subhashit
Tuesday, August 18, 2026
सुभाषित (संत तुलसीदासजी का दोहा)
संगति कीजै साधु की, हरै और की व्याधि।
ओछी संगति नीच की, आठों पहर उपाधि॥
अर्थ : संत तुलसीदासजी कहते हैं कि सज्जनों का संग जीवन के दोषों को दूर करता है, जबकि बुरी संगति हर समय दुःख और परेशानियों का कारण बनती है।
No comments:
Post a Comment
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment