Monday, March 30, 2026

 

विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥

अर्थ : विद्या (ज्ञान) से मनुष्य में विनम्रता (नम्रता) आती है। विनम्रता से वह योग्य (पात्र) बनता है। योग्यता से उसे धन (संसाधन/समृद्धि) प्राप्त होती है। धन से वह धर्म (अच्छे कर्म) करता है और अंत में, धर्म से उसे सुख (खुशी और शांति) मिलती है।

Saturday, March 7, 2026

   (अभंग)

आपुलिया गुणांचे करावे चिंतन,
दोष पाहू नयेत पराचे । 
तुका म्हणे ऐसे होईल जिणे
,
सुखी राहील मनाचे ॥ 

अर्थ : अपने गुणो पर विचार करो और उन्हे बढ़ाने का विचार करो। दूसरों के दोष देखने में समय व्यर्थ न करो । संत तुकाराम जी कहते हैं कि ऐसा जीवन जीने से मन शांत और सुखी रहता है ।