परद्रव्य परनारीचा अभिलाष । तेथुनिया र्हास सर्व भाग्याचा ॥
अर्थ : संत नामदेव जी कहते हैं कि दूसरों के धन और दूसरे की स्त्री की इच्छा करना मनुष्य के पतन का कारण बनता है। ऐसे आचरण से व्यक्ति के सभी सौभाग्य और सम्मान का नाश हो जाता है।
Tuesday, June 9, 2026
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥
अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि जब मैं दूसरों में बुराई ढूंढने निकला, तो मुझे कोई बुरा व्यक्ति नहीं मिला। लेकिन जब मैंने अपने ही मन को गहराई से देखा, तो मुझे एहसास हुआ कि सबसे ज्यादा कमियाँ और बुराई मेरे अंदर ही हैं।
अर्थ : विद्या (ज्ञान) से मनुष्य में विनम्रता (नम्रता) आती है। विनम्रता से वह योग्य (पात्र) बनता है। योग्यता से उसे धन (संसाधन/समृद्धि) प्राप्त होती है। धन से वह धर्म (अच्छे कर्म) करता है और अंत में, धर्म से उसे सुख (खुशी और शांति) मिलती है।
Saturday, March 7, 2026
(अभंग)
आपुलिया गुणांचे करावे चिंतन,
दोष पाहू नयेत पराचे ।
तुका म्हणे ऐसे होईल जिणे,
सुखी राहील मनाचे ॥
अर्थ : अपने गुणो पर विचार करो और उन्हे बढ़ाने का विचार करो।
दूसरों के दोष देखने में समय व्यर्थ न करो । संत तुकाराम जी कहते हैं कि ऐसा जीवन
जीने से मन शांत और सुखी रहता है ।
अर्थ : जो व्यक्ति पीठ पीछे हमारे काम बिगाड़ता हो और सामने मीठी-मीठी बातें करता हो , ऐसे मित्र को त्याग देना चाहिए। वह मित्र ऐसा है जैसे ऊपर से दूध भरा हुआ घड़ा, लेकिन अंदर से ज़हर भरा हो।