subhashit
Wednesday, August 5, 2020
यथा चित्त तथा वाणी , यथा वाणी तथा क्रिया
चित्ते वाचि क्रियायांच , साधुनामिक रुपता
अर्थ : जैसा मन (विचार) वैसी वाणी , जैसी वाणी वैसा कार्य। मन , विचार , वाणी और क्रिया से जो एकरूप होते हैं , वे महापुरुष कहलाते है।
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