Wednesday, August 5, 2020

शान्तितुल्यं  तपो नास्ति , तोषान्न परम्  सुखं 
नास्ति तृष्णापरो व्याधिर्न च्  धर्मो दयापरः 

अर्थ :  मन को शांत रखने जैसा कोई तप नहीं।  संतुष्टि जैसी कोई प्रसन्नता नहीं।  तृष्णा (इच्छा) जैसी कोई व्याधि (बीमारी) नहीं।  दया जैसा कोई धर्म नहीं।  

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