Saturday, March 7, 2026

   (अभंग)

आपुलिया गुणांचे करावे चिंतन,
दोष पाहू नयेत पराचे । 
तुका म्हणे ऐसे होईल जिणे
,
सुखी राहील मनाचे ॥ 

अर्थ : अपने गुणो पर विचार करो और उन्हे बढ़ाने का विचार करो। दूसरों के दोष देखने में समय व्यर्थ न करो । संत तुकाराम जी कहते हैं कि ऐसा जीवन जीने से मन शांत और सुखी रहता है ।


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