subhashit
Wednesday, August 5, 2020
विद्वत्वं च् नृपत्वं च् नैव तुल्यं कदाचन
स्वदेशे पूज्यते राजा , विद्वान सर्वत्र पूज्यते
अर्थ : विद्वता और राजशाही की तुलना नही हो सकती। राजा को आदर सिर्फ उनके देश में ही मिलता है , पर विद्वान को आदर सर्वत्र मिलता है।
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