(अभंग)
आपुलिया गुणांचे करावे चिंतन,दोष पाहू नयेत पराचे ।
तुका म्हणे ऐसे होईल जिणे,
सुखी राहील मनाचे ॥
अर्थ : अपने गुणो पर विचार करो और उन्हे बढ़ाने का विचार करो।
दूसरों के दोष देखने में समय व्यर्थ न करो । संत तुकाराम जी कहते हैं कि ऐसा जीवन
जीने से मन शांत और सुखी रहता है ।