नूपुरे त्वभिजानामि नित्यं पादाभिवन्दनात
अर्थ : जब रावण सीताजी का हरण कर लंका ले जाता है तब सीताजी अपने गहने कपडे की पोटली में बांधकर पुष्पक विमान से नीचे फेक देती है। जब श्रीराम को यह पोटली मिलती है तो वे लक्ष्मण से पूछते है कि क्या ये गहने सीता के है तो लक्ष्मण कहते है : मुझे नहीं मालूम कि यह हाथ कंगन सीताजी के हैं या नहीं और यह भी नहीं मालूम कि यह कानो की बालियां सीताजी की है या नहीं , परन्तु यह पैरो की बालियां सीताजी की है क्योंकि मैं रोज उन्हें पैर पड़ता हूँ।
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